रक्त कैंसर में कारगर है स्टैम सेल ट्रांसप्लांट

दो दिवसीय कैंसर शिविर में 120 मरीजों की जांच हुई

डॉ. शिवा अग्रवाल

हरिद्वार। रामकृष्ण मिशन चिकित्सालय कनखल में चल रहे दो दिवसीय निःशुल्क रक्त कैंसर शिविर का आज समापन हो गया। इस शिविर में कुल 120 मरीजों ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई। लंदन एवं अहमदाबाद से आए चिकित्सकों ने रोगियों को रक्त कैंसर के बारे में विस्तार से बताया तथा इसके इलाज के लिए आवश्यक परामर्श दिया। इस अवसर पर रामकृष्ण मिशन चिकित्सालय के चिकित्सकों के लिए सीएमई ऑन हीमैटोलोजी सत्र का भी आयोजन किया गया जिसमें बाहर से आये चिकित्सकों ने रक्त कैंसर पर अपने अनुभवों को साझा करने के साथ रोग की पहचान, निदान एवं वर्तमान में इलाज के तरीकों से अवगत कराया।


मिशन चिकित्सालय में आयोजित इस दो दिवसीय निःशुल्क रक्त कैंसर शिविर के बारे में जानकारी देते हुए स्वामी दयाधिपानन्द ने बताया कि आज शिविर के दूसरे दिन भी लगभग 20 मरीजों का स्वास्थ्य जांचा गया। इस तरह दो दिन तक चले इस  शिविर में लगभग 120 मरीजों ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई। उन्होने बताया कि चिकित्सालय में लंदन और अहमदाबाद से आए चिकित्सकों ने इन मरीजों से विस्तार से बातचीत की तथा इनके रोग एवं उसके निदान पर जरूरी सलाह दी। दो दिन तक चले इस शिविर में एनीमिया, हेमोफीलिया, प्लेटलेट्स डिसऑर्डर, बोनमैरो डिसऑर्डर, ल्यूकेमिया, ब्लीडिंग, सिक्कल सैल एवं लिम्फोमा आदि रोग से ग्रसित मरीजों के स्वास्थ्य को जांचा गया। उन्होने बताया कि रामकृष्ण मिशन चिकित्सालय अपने चिकित्सा सेवा प्रकल्पों के लिए विख्यात है। स्वामी जी ने कहा कि आज विभिन्न प्रकार के कैंसर ने लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। कैंसर रोग से पीड़ित व्यक्ति मानसिक तनाव में रहते हैं तथा पर्याप्त जानकारी के अभाव में उपलब्ध इलाज से भी वंचित रह जाते हैं। उन्होने कहा कि समय पर रोग की जांच कराना तथा उसका इलाज करना जिन्दगी बचाता है। आज बदलती जीवनशैली तथा वातावरण परिवर्तन के कारण विभिन्न प्रकार के कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कैंसर का यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो यह रोगी की जान ले लेता है। उन्होने कहा कि यदि कैंसर की समय पर जांच एवं पहचान हो जाए तो उपलब्ध साधनों के आधार पर रोगी की जान बचाई जा सकती है तथा रोग के साथ उसकी दिनचर्या को ठीक रखा जा सकता है। यूं तो कैंसर कई प्रकार के होते है, जैसे कि पेट का कैंसर, गले का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर आदि, जिनमे ब्लड कैंसर भी कैंसर का एक प्रकार है जो की खून में होता है। इसमें कैंसर की कोशिकाएं धीरे-धीरे खून में फैलने लग जाती है। ब्लड कैंसर यानि एक्यूट माइलॉइड ल्यूकीमिया  खून एवं बोन मैरो यानी अस्थिमज्जा का एक प्रकार का कैंसर है। उन्होने कहा कि मरीज अपने रोग के प्रति सतर्क रहें तथा सही इलाज पा सकें इसी लिए विशेषज्ञ चिकित्सक शिविर में बुलाए गये हैं। दो दिवसीय शिविर के साथ ही मिशन चिकित्सालय के क्राफेंस हॉल में स्थानीय चिकित्सकों के लिए सीएमई सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र के माध्यम से आगन्तुक चिकित्सकों ने रक्त कैंसर के इलाज के नये तरीकों से अवगत कराया। सत्र को संबोधित करते हुए रॉयल फ्री हॉस्पिटल लंदन के हीमैटोलॉजिस्ट डॉ0 अतुल मेहता ने थ्रोम्बोसाइटोपेनिया एवं एनीमिया आदि के बारे में जानकारी दी। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से आये डॉ0 आशुतोष ने मायलोमा पर विस्तार से चर्चा की। पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से रोग की पहचान, इसके लक्षण एवं इलाज के बारे में उन्होने अपने अनुभव साझा किये तथा चिकित्सकों के सवालों का जवाब दिया। वेदान्ता कैंसर इंस्टिट्यूट अहमदाबाद से आए चिकित्सक डॉ0 सन्दीप शाह नेे रक्त कैंसर के उपचार की स्टैम सैल प्रत्यारोपण के बारे में बताया। उन्होने कहा कि यदि रक्त कैंसर की समय पर जांच हो जाए तो रोगी को इस थैरेपी के जरिए बचाया जा सकता है। इस अवसर पर स्वामी दयाधिपानन्द एवं डॉ0 समरजीत चौधरी ने सभी का आभार व्यक्त किया। सत्र मे मिशन चिकित्सालय से कंसलटेंट डॉ. कुलदीप, डॉ0 अर्चना, डॉ0 कुलकर्णी, डॉ0 अश्विनी सहित अन्य लोग उपस्थित हुए।   

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