मिशन चिकित्सालय में रक्त कैंसर के मरीजों की हुई जांच

समय पर रोग के इलाज से बचती है जिंदगी

हरिद्वार से डॉ. शिवा अग्रवाल

रामकृष्ण मिशन चिकित्सालय कनखल में चल रहे दो दिवसीय निःशुल्क रक्त कैंसर शिविर में आज लंदन एवं अहमदाबाद से आए चिकित्सकों ने 50 मरीजों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया तथा महत्वपूर्ण परामर्श दिया।


मिशन चिकित्सालय में आयोजित इस दो दिवसीय निःशुल्क रक्त कैंसर शिविर के बारे में जानकारी देते हुए स्वामी दयाधिपानन्द ने बताया कि आज शिविर के प्रथम दिवस सवेरे 50 मरीजों को चैकअप किया गया। उन्होने बताया कि चिकित्सालय में लंदन और अहमदाबाद से आए चिकित्सकों ने इन मरीजों से विस्तार से बातचीत की तथा इनके रोग एवं उसके निदान पर जरूरी सलाह दी। उन्होने बताया कि दो दिन चलने वाले इस शिविर में एनीमिया, हेमोफीलिया, प्लेटलेट््स डिसऑर्डर, बोनमैरो डिसऑर्डर, ल्यूकेमिया, ब्लीडिंग, सिक्कल सैल एवं लिम्फोमा आदि रोग से ग्रसित मरीजों के स्वास्थ्य को जांचा गया। उन्होने बताया कि रामकृष्ण मिशन चिकित्सालय अपने चिकित्सा सेवा प्रकल्पों के लिए विख्यात है। स्वामी जी ने कहा कि आज विभिन्न प्रकार के कैंसर ने लोगां को अपनी गिरफ््त में ले लिया है। कैंसर रोग से पीड़ित व्यक्ति मानसिक तनाव में रहते हैं तथा पर्याप्त जानकारी के अभाव में उपलब्ध इलाज से भी वंचित रह जाते हैं। उन्होने कहा कि समय पर रोग की जांच कराना तथा उसका इलाज करना जिन्दगी बचाता है। आज बदलती जीवनशैली तथा वातावरण परिवर्तन के कारण विभिन्न प्रकार के कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कैंसर का यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो यह रोगी की जान ले लेता है। उन्होने कहा कि यदि कैंसर की समय पर जांच एवं पहचान हो जाए तो उपलब्ध साधनों के आधार पर रोगी की जान बचाई जा सकती है तथा रोग के साथ उसकी दिनचर्या को ठीक रखा जा सकता है। बताते चलें कि बढ़ती आबादी, दिन-रात की तरक्की के इस दौर में बीमारियाँ भी तेज रफ़्तार से बढ़ रही हैं। हम आए दिन किसी नई बीमारी से रूबरू होते हैं। वैसे तो कई बीमारियाँ हैं, जो सामान्य होती है पर कई बीमारियाँ ऐसी भी हैं, जिसका नाम सुनते ही घबराहट और निराशा होना लाज़मी है। ये जानलेवा बीमारियाँ ठीक ठीक कम और ज्यादातर पीड़ितों को मौत की आगोश में ले लेती हैं, और कई बार मरीज के साथ लापरवाही बरतने पर उसके अपनों को भी। तो ऐसी भयावह बीमारियों में से एक बीमारी ब्लड कैन्सर है। इन दिनों ब्लड कैंसर के मरीजों की संख्या काफी तेज़ी से बढ़ती जा रही है। यूं तो कैंसर कई प्रकार के होते है, जैसे कि पेट का कैंसर, गले का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर आदि, जिनमे ब्लड कैंसर भी कैंसर का एक प्रकार है जो की खून में होता है। इसमें कैंसर की कोशिकाएं धीरे-धीरे खून में फैलने लग जाती है। पर हाँ यह कोशिकाएं समाप्त नहीं होती है, बल्कि दिन-प्रतिदिन और गंभीर रूप लेने लगती है। ब्लड कैंसर यानि एक्यूट माइलॉइड ल्यूकीमिया खून एवं बोन मैरो यानी अस्थिमज्जा का एक प्रकार का कैंसर है। दरअसल हमारी हड्डियों के अंदर पाई जाने वाली मज्जा ब्लड स्टेम सेल पैदा करता है। यह सेल्स विकास की प्रक्रिया में आगे बढ़कर परिपक्व होती हैं। इन्हीं से सफेद रक्त कणिका संक्रमण से लड़ती हैं। लाल रक्त कणिका पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं और प्लेटलेट्स थक्का बनाकर खून को बहने से रोकती हैं, एक्यूट माइलॉइड ल्यूकीमिया में ऐसा विकार पैदा हो जाता है कि सफेद रक्त कणिकाएं मतलब वाइट ब्लड सेल्स परिपक्व होती ही नहीं। वहीं कई लाल रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स में भी खराबी आने लगती है। और ऐसा होने पर शुरूआती दौर में सही से ट्रीटमेंट न किया जाए तो यह कैंसर बड़ी तेजी से बेहद खराब दशा में पहुंच जाता है। मरीज अपने रोग के प्रति सतर्क रहें तथा सही इलाज पा सकें इसी लिए विशेषज्ञ चिकित्सक शिविर में बुलाए गये हैं। बुधवार को भी यह चिकित्सका कैंसर के अन्य मरीजों को देखेंगे। शिविर में डॉ0 अतुल मेहता, डॉ0 आशुतोष एवं डॉ0 संदीप शाह उपस्थित रहे।

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