DAV स्कूल प्रबंधन शिक्षकों से बिकवा रहा किताबें

नवीन पांडे, हरिद्वार। राज्य सरकार ने किताबो की आड़ में चल रहे गोरखधंधे एवं फीस में हर साल मनमानी पर नकेल कसने की कवायद क्या की विभिन्न पब्लिक स्कूल फड़फड़ाने लगे हैं। कुछ तो लाइन पर आ गए हैं परंतु कुछ के लिए सरकारी आदेश का कोई मोल नही। सत्र शुरू होने के बाद NCERT की किताबों के बजाय खुद के प्रकाशन की किताबें स्कूल के शिक्षकों के ही काउंटर लगवा कर बिक़वाई जा रही हैं। वहीं नए सत्र के 20 दिन गुजर जाने के बाद भी बच्चो को फी बुक नही दी गई है। जिससे अभिभावकों में रोष व्याप्त है।
गौरतलब है कि अभिभावकों के लगातार विरोध के बावजूद निजी स्कूल मानने को तैयार नही हैं। कभी फीस में मनमानी वृद्धि तो कभी पुस्तक तो कभी यूनिफार्म के नाम पर अभिभावकों का शोषण किया जाता है। बीते दिनों राज्य सरकार ने पुनः प्रवेश या एनुअल चार्ज लेने पर रोक लगाई थी परंतु निजी स्कूलों ने इसके अन्य तरीके खोज निकाले थे। इस सत्र में सरकार द्वारा पाठ्यक्रम में ncert की किताबें अनिवार्य की गई हैं जिसके चलते सत्र शुरू होते ही निजी स्कूल हड़ताल पर चले गए थे। हाइकोर्ट के आदेश के बाद स्कूल तो खुले परंतु अपनी मनमर्जी से प्रकाशकों से सेटिंग गेटिंग करने वाले स्कूल प्रबंधन को अपना कमीशन जाता दिख रहा है। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर स्टेट अप्डेट्स को बताया कि जगजीतपुर स्थित DAV पब्लिक स्कूल द्वारा 19 अप्रैल को कक्षा 6,7 एवं 8 की किताबें खुद के प्रकाशन की बिक़वाई गई। मजे की बात यह रही कि प्रबंधन द्वारा किताबें बेचने के लिए खुद शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है। यद्यपि dav प्रकाशन की पुस्तके पहले से चलती हैं परंतु इनको हर बार संजीव स्टेशनर स्कूल में काउंटर लगा कर बेचता था जिसमे अभिभावकों को कॉपी, पेंसिल, ग्लू आदि भी लेना पड़ता था इस बार सिर्फ किताबे शिक्षक बेच रहे हैं। शिक्षकों की मजबूरी है कि वह चाहकर भी उक्क्त व्यवस्था का विरोध नही कर सकते क्योंकि सवाल नोकरी का है। वहीं दूसरी ओर अभी तक कई स्कूलों ने फी बुक भी बच्चों को नही दी है। कुल मिलाकर पब्लिक स्कूल सुधरने को तैयार नही हैं। राज्य सरकार को अन्य ठोस कदम उठाने होंगे।

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