डी.एल.एड. ( D.El.Ed.) एवं ब्रिज कोर्स वालों को शिक्षा मंत्री के इस बयान से लग सकता है बड़ा झटका, देखिए पूरी वीडियो

https://youtu.be/0W1QN-VZBbY 

देहरादून। लगभग 15 हजार शिक्षक इस आस में हैं कि शायद सरकार उन्हें डी.एल.एड. (D.El.Ed.) एवं ब्र्रिज कोर्स से मुक्ति दे दे। वहीं दूसरी ओर केन्द्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर के शब्दों पर गौर करें तो सेवारत शिक्षकों को इन पाठ्््यक्रमों से मुक्ति मिलनी असंभव ही लगती है। ऐसे में प्रदेश सरकार असमंजस में है तथा बस सिर्फ यही फार्मूला बचता है जिसके चलते इस प्रशिक्षण को सेवारत प्रशिक्षण का नाम दे दिया जाए। विदित हो कि बीते दिनों केन्द्र सरकार ने नई व्यवस्था के तहत विशिष्ट बीटीसी के जरिए नौकरी में आए शिक्षकों को अप्रशिक्षित मानते हुए एनआईओएस के जरिए नॉन बी.एड. दो वर्ष का डीएलएड कोर्स एवं बी.एड. वालों को छह माह का ब्रिज कोर्स करने के आदेश जारी किये थे। यह कोर्स सरकारी एवं गैर सरकारी सभी स्कूलों के शिक्षकों का करना था। राज्य के तकरीबन 15 हजार शिक्षक इस बात से नाराज चल रहे हैं कि जब वह स्थायी एवं प्रशिक्षित शिक्षक का वेतनमान ले रहे हैं तो उनसे यह कोर्स क्यों करवाया जा रहा है। शिक्षकों ने चरणबद््ध तरीके से आंदोलन भी चलाया तथा सरकार को बाध्य किया कि वह केन्द्र सरकार से बातचीत करे। मंत्री प्रकाश पंत, सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं खुद शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डे ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर से मुलाकात कि परन्तु कोई हल नहीं निकल पाया है। अब सरकार बीच का रास्ता निकालने जा रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्टेट अप्डेट््स को बताया कि 2019 में 15 हजार शिक्षकों की नौकरी पर न बने इसलिए उन्हें कोर्स तो कराया जाएगा परन्तु इसे सेवारत प्रशिक्षण का नाम दे दिया जाएगा तथा शिक्षक अप्रशिक्षित की श्रेणी में नहीं आएंगे। कुल मिलाकर इस प्रक्रिया में भी पेंच हैं क्योंकि सेवारत प्रशिक्षण विभाग अपने खर्च पर कराता है इससे अब शिक्षक इस व्यवस्था की भी मुखालफत कर सकते हैं।

 

 

 

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