मौसम बदलते वक्त ASTHMA बिगाड़ सकता है सेहत

आजकल के दौर में जैसे-जैसे आबोहवा प्रदूषित हो रही है तमाम तरह की एलर्जिक समस्याएं बढ़ने लगी हैं। मौसम परिवर्तन के समय कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं जिनसे रोगी को अत्यंत कष्ट होता है। ऐसी ही बीमारी Asthma है जिसके चलते लोगो को तमाम भ्रांतियों के कारण  मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
अस्थमा और इसकी उपचार पद्धति के बारे में विभिन्न भ्रांतियों को दूर करते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि इंहेलेशन थेरेपी इसके उपचार का सबसे कारकर और प्रभावी तरीका है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मोहित चौहान के मुताबिक, “इंहेल्ड कोरटिकोस्टेरॉयड थेरेपी (आईसीटी) अस्थमा को नियंत्रित करने में सबसे कारगर इलाज है। आईसीटी में दवा की बहुत कम डोज सीधे सूजन भरी सांस की नलियों में पहुंचती है। इसके साइड इफैक्ट्स भी सीमित होते हैं। ओरल दवा का डोज आईसीटी के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है। ज्यादा दवा का डोज़ शरीर के अन्य अंगों में भी जाता है, जिसे दवा की जरूरत नहीं होती है। इसके साइड इफैक्ट्स की आशंका भी अधिक होती है।” अस्थमा को नियंत्रित करने में सबसे बड़ी चुनौती दवा का अनियमित सेवन है। लोग अक्सर लक्षण नजर न आने पर कुछ समय बाद ही दवा छोड़ देते हैं। लेकिन लक्षण न दिखने का मतलब अस्थमा मुक्त होना नहीं है। इसके गंभीर परिणाम सामने आते हैं और इसलिए दवा छोड़ने से पहले चिकित्सक का परामर्श आवश्यक होता है।
डॉ. चौहान के अनुसार, “अस्थमा लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, जिसे लंबे समय तक इलाज की जरूरत होती है। कई रोगी जब खुद को बेहतर महसूस करते हैं तो इंहेलर लेना छोड़ देते हैं। यह खतरनाक हो सकता है, क्योंकि आप उस इलाज को बीच में छोड़ रहे हैं, जिससे आप फिट और स्वस्थ रहते हैं। रोगियों को इंहेलर छोड़ने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। अपनी मर्जी से इंहेलर छोड़ना जोखिमभरा हो सकता है।”
रोगियों द्वारा इंहेलर लेने से आनाकानी करने की वजह के बारे में पूछे जाने पर डॉक्टर कहते हैं , “इसके कई कारण हैं। इनमें दवा की कीमत, साइड इफैक्ट्स, इसे लेकर भ्रांतियां और सामाजिक अवधारणाएं शामिल हैं।”

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